कोलेस्ट्रॉल कम करने की आयुर्वेदिक दवा

वर्तमान समय में मनुष्य को ब्लड प्रेशर, थायरोइड, डायबिटीज, कोलेस्ट्राल, आदि बीमारियाँ का होना आम बात है। कोलेस्ट्रॉल मानव शरीर में लिवर द्वारा बनाया जाने वाला फैट है। कोलेस्ट्रोल शरीर के नर्वस सिस्टम, सैल की दीवारों के हॉर्मोंस के निर्माण एवं सुरक्षा आवरण के निर्माण में अहम भूमिका रखता है। कोलेस्ट्रॉल एक वसायुक्त तत्व है जिसका निर्माण यकृत द्वारा किया जाता है। हमारे शरीर के स्वस्थ रूप से कार्य करने रहने के लिये शरीर में केलेस्ट्रोल का बनना आवश्यक है। Cholesterol को रक्तवसा एवं पित्त-सांद्रव के नाम से भी जाना जाता है। कोलेस्ट्रॉल प्रोटीन के साथ मिलकर लिपोप्रोटीन का निर्माण करता है, जो वसा (फैट) को रक्त में घुलने से रोकता है। मानव शरीर दो प्रकार के कोलेस्ट्रॉल का निर्माण करता है हाई डेंसिटी लीपोप्रोटीन (एच.डी.एल) जिसे मानव शरीर के लिये अच्छा कोलेस्ट्राल माना जाता है।लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एल.डी.एल) जिसे मानव शरीर के लिये बुरा कोलेस्ट्राल माना जाता है।

HDL को गुड कोलेस्ट्रोल एवं LDL को बैड कोलेस्ट्रॉल भी बोला जाता है। मानव शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम या ज्यादा होने पर विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ घर कर लेती हैं। गुड कोलेस्ट्रोल हल्का होता है जो ब्लड वेसेल्स में जमें वसा (फैट) को अपने साथ बहाकर ले जाता है। बैड कोलेस्ट्रॉल चिपचिपा और गढ़ा होता है, इसकी मात्रा के शरीर में बढ़ने पर यह ब्लड वेसेल्स और आर्टरी की वाल्स पर जम जाता है और रक्त के बहाव में रूकावट आती है। शरीर में कोलेस्ट्राल की अधिकता होने पर उच्च रक्त चाप, थायरोइड, डायबिटीज, ओबेसिटी जैसी अन्य गम्भीर बीमारियॉ हो सकती हैं। मानव शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढने पर यह रक्त कोशिकाओं (Blood Vessels) में फैट जमने लगता है और बल्ड सर्क्यूलेशन बाधित होने लगता है और हृदय को शरीर के सभी हिस्सों तक ब्लड पहुँचाने के लिये अधिक पम्प करना पड़ता है। कोलेस्ट्राल शरीर के हार्मोन्स को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। कोलेस्ट्रोल शरीर से हानिकारक पदार्थों को अलग कर शरीर को स्वस्थ एवं बलवान बनाने में मदद करता है। प्रातः काल की सूर्य की किरणों (धूप) से मानव शरीर द्वारा विटामिन डी बनाने की क्रिया भी कोलेस्ट्राल के कारण ही सम्भव है। मानव मष्तिष्क के ठीक से कार्य करने के लिये भी कोलेस्ट्रॉल लेवल का सामान्य होना आवश्यक है। आयुर्वेदानुसार शरीर में कफ की मात्रा बढने पर कोलेस्ट्रॉल की उत्पत्ति होती है। आज इस लेख में हम जानेंगे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कैसे रखें।

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संतुलित कोलेस्ट्रॉल

रक्त में कोलेस्ट्राल का लेवल 3.6 से 7.8 मिलीमोल्स प्रति लीटर की रेंज में होना मैडीकल साइंस में बताया गया है। यदि यह स्तर 6 मिली मोल्स प्रति लीटर हो जाता है तो हाई कोलेस्ट्राल कहलाता है परन्तु यदि इसकी वैल्यू 7.8 मिली मोल्स प्रति लीटर से ऊपर निकल जाती है तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। कोलेस्ट्राँल की जाँच किसी भी पैथोलाजी लैब पर लिपिड प्रोफाइल ब्लड टैस्ट कराकर की जा सकती है।

हाइ कोलेस्ट्राल के शुरूआती लक्षण

यदि आपका कोलेस्ट्राल बढ गया है तो आपको शुरूआती लक्षण देखने को मिलेंगे । यदि आप इन शुरूआती लक्षणों को नजर अंदाज करेंगे तो आपको भविष्य में गम्भीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जैसे

  • थकान
  • सास फूल जाना
  • चक्कर आना
  • हाथ पैर का सुन्न हो जाना
  • वजन का बढ जाना
  • हॉर्ट अटैक
  • ब्लाकेज
  • सीने में दर्द
  • गुर्दे सम्बन्धी रोग
  • स्ट्रोक
  • हृदय गति का रूक जाना

कोलेस्ट्राल बढ़ने के कारण (Caused of High Cholesterol)

शरीर का कोलेस्ट्रॉल बढने का मुख्य कारण खराब दिनचर्या एवं असंतुलित अहार है। शरीर में हाइ कॉलेस्ट्रोल होने के मुख्य कारण निम्नवत हैं ।

  • मोटापा
  • बढ़ती उम्र
  • डायबिटीज
  • थायराइड
  • धूम्रपान करना
  • मदिरा / शराब का सेवन
  • व्यायाम न करना
  • चिंता
  • आनुवांशिक कारण
  • वसायुक्त भोजन का प्रयोग
  • किडनी (गुर्दे) की बीमारी
  • एड्स / एचआईवी

कोलेस्ट्रॉल कम करने की आयुर्वेदिक दवा

आरोग्यवर्द्धिनी वटी

आरोग्यवर्द्धिनी वटी

आरोग्यवर्द्धिनी वटी जैसा का नाम से स्पष्ट है जो शरीर के रोगों को दूर कर आरोग्य प्रदान करे। आरोग्यवर्धिनी वटी (divya arogya vati) के मुख्य घटक पारद, गंधक, नीम के पत्तों का रस, लोह भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, कुटकी, हरीतकी, विभीतकी, आमलकी, शिलाजतु, चित्रक, गुग्गुल आदि हैं। आरोग्यवर्ध्दिनी वटी का प्रयोग वजन घटाने, शारीरिक दर्द, लिवर संबंधी बीमारियों, रक्त विकार, मूत्र रोग, चर्म रोग, कोलेस्ट्राल सम्बन्धी बीमारियों आदि में किया जाता है। इस पतंजली मेडिसिन को सूर्य की रोशनी से अलग ठण्डे एवं सूखे स्थान पर रखा जाता है। यह दवा विभिन्न कम्पनी द्वारा तैयार की जाती है। इस मेडिसन के प्रयोग से पहले चिकित्सक का परामर्श अवश्य लें।

पुनर्नवा मंडूर

पुनर्नवा मंडूर

बैद्यनाथ पुनर्नवादि मंडूर रुहल्दी, गिलोय, गुग्गुल, पुनर्नवा आदि जडीबूटी से निर्मित आयुर्वेदिक दवा है जो कोलेस्ट्राल कम करने में प्रयोग की जाती है। इस मेडिसिन का प्रयोग एनीमिया, हेपेटाइटिस, पेट सम्बन्धी विकार, पीलिया, आदि बीमारियों के इलाज में किया जाता है। यह दवा लिवर पर डायरेक्ट प्रभाव डालती है इसलिए यह कोलेस्ट्रोल समबन्धी विकारों को दूर करने में कारगर है।

त्रिफला

त्रिफला

त्रिफला को महाऔषधि भी कहा जाता है। यह पेट सम्बन्धी विकारों को दूर कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। यह आपकी पाचन शक्ति को तीव्र करती है। यह ब्लड सर्कुलेशन को सही करके कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करने में मददगार औषधि है।

मेदोहर वटी

मेदोहर वटी

दिव्य मेदोहर वटी को मोटापा दूर करने के प्रयोग किया जाता है। मेदोहर वटी आंवला, बहेडा, हरड, निशोथ, बबूल गोंद, कुटकी, शुद्ध गुग्गल, शुद्ध शिलाजीत, वायविडिंग के सम्मिश्रण से तैयार औषधि है। यह पाचन शक्ति को सुधार कर हार्मोन्स को कंट्रोल करता है। मेदोहर वटी के सेवन से विषैले पदार्थ शरीर से बाहर आते हैं तथा कोलेस्ट्रोल कंट्रोल होता है।

त्रिकटु

त्रिकटु

त्रिकटु चूर्ण सोठ, काली मिर्च व पिप्पली (पीपल) से तैयार चूर्ण है। भिन्न भिन्न कम्पनी द्वारा इस चूर्ण को भिन्न भिन्न नाम से बाजार में बेचा जाता है। पतंजलि त्रिकटु चूर्ण में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-डिस्लिपिडेमिया और इम्यून-मॉड्यूलेटरी प्रभाव होने के कारण पाचन शक्ति, कोलेस्ट्राल कम करने, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाने में कारगर है।

कोलेस्ट्रॉल कम करने की अंग्रेजी दवा

नियासिन या निकोटिनिक एसिड (Niacin or nicotinic acid)

Niacin or nicotinic acid)

नियासिन या निकोटिनिक एसिड बिटामिन B3 की श्रेणी में आती हैं। यह कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल कर ब्लड वेसिल को कठोर होने से रोकने में मदद करती हैं। रक्त में ट्राइग्लिसरॉइड के बढने पर डाक्टर्स द्वारा यह मेडीसिन दी जाती है।

स्टेटिन

स्टेटिन

स्टेटिन अंग्रेजी की दवा हाइ कालेस्ट्रोल को नियंत्रित करने के लिए डाक्टर द्वारा परामर्श की जाती है। स्टेटिन का प्रयोग डाक्टर की सलाह के उपरान्त ही करें क्योंकि एलोपैथिक दवाओं के अपने अलग नुकसान होते हैं।

Bile acid sequestrants

Bile acid sequestrants

बाइल एसिड सिक्यूरेंट्स का प्रयोग कोलेस्ट्रोल को कम करने के साथ साथ हृदय सम्बन्धी बीमारी में भी किया जाता है। यह अंग्रेजी मेडिसिन डाक्टर के प्रिसक्रिप्शन पर मिलने वाली मेडिसिन है।

फाइब्रेट्स (Fibrates)

Fibrates

फ्रिबेट बल्ड में ट्राइग्लिसराइड्स के बढने पर डाक्टर द्वारा दी जाने वाली अंग्रेजी मेडिसिन है। यह मेडिसिन High Cholesterol को कंट्रोल करने में प्रयोग की जाती है।

कोलेस्ट्रॉल कम करने के तरीके

संतुलित डायट

सर्वप्रथम कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिये आपको अपने आहार से अनहैल्दी फैट को हटाना होगा । यह अनहैल्दी फैट (संतृप्त वसा) ऐसे भोजन में पायी जाती है जिसमें फैट एवं कोलेस्ट्रोल अधिक होता है । Cholesterol kam karne ke upay में सबसे अच्छा है कि आप अपने आहार से मक्खन, घी, पनीर, रैड मीट, केक आदि वसा वाले खाद्य पदार्थों का प्रयोग कम कर दें । यह कोलेस्ट्राँल को कम करने की सबसे अच्छी तरकीब है ।

शराब का कम प्रयोग

ज्यादा शराब / दारू के सेवन से हमारे लिवर एवं हर्ट पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कोलेस्ट्रोल की मात्रा को शरीर में बढ़ा देता है । यदि आप डेली ड्रिंकर हैं तो लिकर का प्रयोग कर दें । यह कोलेस्ट्राल को कम करने का तरीका है ।

तनाव से दूर रहें 

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि तनाव / चिंतन मानव शरीर के लिए सही नहीं है । जब भी कोई व्यक्ति तनाव में होता है तो शरीर सही से कार्य नहीं करता है । और डिप्रेशन से निकलने के लिए आदमी भांति भांति के नशे जैसे शराब, तम्बाकू, सिगरेट, ड्रग्स आदि का प्रयोग करने लगता है । जिससे मानव शरीर में केलेस्ट्राल की मात्रा बढ जाती है । अतः तनाव से बचें ।

व्यायाम

यदि आप प्रतिदिन रनिंग, वर्कआउट आदि दैनिक क्रियाए नहीं करते हैं तो आपको कोलेस्ट्राल की समस्या पैदा होने के काफी संभावना है तो कोलेस्ट्राल से बचने के लिए अपने जीवन में प्राणायाम, योगा, जागिंग, एक्सरसाइज को अहम स्थान दें । अपने शरीर के आलस्य को दूर करें और शरीर को सक्रीय रखे ।

कालेस्ट्रॉल कम करने का रामबाण घरेलू उपचार

यदि आप कोलेस्ट्राल बढने के शुरुआती लक्षण महसूस कर रहे हैं तो आप कालेस्ट्रॉल कम करने के घरेलू उपाय अपनाकर कोलेस्ट्रोल को नियंत्रत कर सकते हैं । तो चलिये जानते हैं कोलेस्ट्राल कम करने के घरेलू नुस्खे जिन्हें अपना कर आप अपने शरीर का कोलेस्ट्राल कम कर सकते हैं।

अखरोट का प्रयोग (Use of Walnut)

अखरोट का प्रयोग

अखरोट की मिंगी में ओमेगा- 3, कैल्शियम, मैग्नीशियम, कापर, फाइबर, फास्फोरस आदि अन्य तत्व का भण्डार है । रोजाना चार अखरोट खाने से पूरे दिन आपके शरीर में एनर्जी बनी रहेगी । अखरोट में मौजूद यह पोषक तत्व रक्त वाहिनियों में ब्लड कोलेस्ट्राल को जमने नहीं देता है और एल0डी0एल को वापस लिवर तक भेजने में सहायता प्रदान करता है । अखरोट के प्रयोग से शरीर में ट्राइग्लिसराइड का स्तर भी नहीं बढता है। अतः प्रतिदिन चार अखरोट अवश्य खायें ।

लहसुन का प्रयोग (Use of Garlic)

लहसुन का प्रयोग

कभी कभी आप सोचते होंगे कि कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए क्या खाना चाहिए। तो हम आपको सजैस्ट करेंगे की आप अपने भोजन में लहसन को एड कर लें। गार्लिक में कुछ ऐसे एंजाइम्स होते हैं जो एलडीएल (बैड कालेस्ट्राल) को कम करने में मदद करते हैं । लहसन का प्रयोग उच्च रक्तचाप की समस्या को भी दूर करने में सहायक है। कोलेस्ट्राल कम करने के घरेलू उपाय में रोजाना लहसुन की दो कलिया छीलकर खाना शरीर के लिये अच्छा है।

ओट्स का प्रयोग (Use of Oats)

ओट्स का प्रयोग

ओट्स घुलनशील फाइबर से भरपूर होता है। ओट्स में बीटा ग्लूकॉन नाम का गाढा चिपचिपा पदार्थ आतों की सफाई में मदद करता है तथा पुरानी से पुराना कब्ज (Constipation) की समस्या को भी दूर करता है। यह शरीर में बैड कालेस्ट्राल के अवशोषण को कम करता है। ओट्स पाचन तंत्र को सही करता है । यदि आप अपनी डाइट में तीन माह तक ओट्स का प्रयोग करते हैं तो आपका कोलेस्ट्राल लेवल लगभग 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

प्याज का प्रयोग (Use of Onion)

प्याज का प्रयोग

वैज्ञानिक शोध से ज्ञात हुआ है कि लाल प्याज शरीर खराब कोलेस्ट्राल को कम करती है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढाती है। प्याज के प्रयोग से हर्ट डिजीज का खतरा भी कम होता है। प्याज को दही और काली मिर्च मिला कर प्रयोग करें या आप प्याज के रस को एक चम्मच शहद के साथ प्रयोग कर कोलेस्ट्रोल कम करने के लिए खा सकते हैं।

सोयाबीन का प्रयोग (Use of Soyabeans)

सोयाबीन का प्रयोग

शरीर में कालेस्ट्रॉल कम करने की दवा लेने से अच्छा है कि आप अपनी डाइट में अंकुरित दालें जैसे सोयाबीन, चना, राजमा, रमास (लोबिया), अंकुरित अनाज को स्थान दें। यह उत्पाद शरीर से बैड कोलेस्ट्रॉल को निकालने में लिवर की मदद करते हैं तथा अच्छे हार्मोन्स की ग्रोथ करते हैं।

संतरे का प्रयोग (Use of Oranges)

संतरे का प्रयोग

खट्टे फल जैसे संतरा, नीबू, आंवला आदि में कुछ लाभकारी घुलनशील फाइबर होते हैं जो खाने की थैली में ही एलडीएल को रक्त प्रवाह में जाने से रोकते हैं। खट्टे फलों में मौजूद बिटामिन सी, फोलिक एसिड, फ्लेवोनोइड रक्त नालिकाओं की सफाई करते हैं। नीबू व संतरा आदि में कुछ ऐसे एंजाइम होते हैं जो शरीर के मोटाबालिज्म को तेज करके बढे हुये कालेस्ट्रोल को कम करने में मदद करते हैं।

जैतून का तेल का प्रयोग (Use of Olive Oil)

जैतून का तेल का प्रयोग

ऑलिव ऑयल में पाया जाने वाला अनसैचुरेटेड फैट कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद करता है। यह आर्टरी की दीवारों को मजबूत करने का काम करता है। जैतून के तेल के प्रयोग से हृदय रोग की आशंका भी कम हो जाती है तथा ब्लड प्रेशर तथा डायबिटीज को भी कंट्रोल करता है। यदि आपको Cholesterol ke lakshan नजर आते हैं तो आम अपने भोजन में सीमित मात्रा में आलिव आयल का प्रयोग करना शुरू कर दें।

अलसी के बीज का प्रयोग (Use of Flex Seeds)

अलसी के बीज का प्रयोग

अलसी में Omega 3 और Omega 6 जैसे फैटी एसिड्स पाये जाते हैं। जिसकी मानव शरीर में एक अलग भूमिका है। अलसी के प्रयोग से बैड कालेस्ट्राल शरीर में घर नहीं कर पाता है। आप अलसी के बीजों को पीसकर पाउडर बनाकर सब्जी या छाछ के साथ प्रयोग कर सकते हैं।

काला चना का प्रयोग (Use of Bengal Gram)

काला चना का प्रयोग

काला चना कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक है, काला चना आयरन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, फाइबर, बिटामिन ए, बिटमिन बी, बाइटामिन सी, विटामिन डी जैसे अन्य पोषक तत्व का भण्डार है। यदि आपका कोलेस्ट्राल लेवल उच्च रहता है तो आप रात में कुछ दाने काले चने के पानी में भिगोकर छोड दे और प्रातः इन चनों का खाली पेट सेवन करें। इसके अलावा आप भुने हुये चने का इस्तेमाल भी कोलेस्ट्राल कम करने का देशी उपाय अपना सकते है।

किशमिश बादाम का प्रयोग (Use of Raisin and Almonds)

किशमिश बादाम का प्रयोग

यदि आप कोलेस्ट्राल बढने के लक्षण महसूस कर रहे हैं तो तुरंत लिपिड प्रोफाइल ब्लड टैस्ट कराकर कोलेस्ट्रोल कम करने की आयुर्वेदिक दवा (घरेलू उपचार) अपनाएं। रात्रि में कुछ दाने किशमिश के तथा कुछ बादाम पानी में भिगोकर छोड़ दें और सुबह इन किशमिश और बादाम का खाली पेट ग्रहण करें। यदि आपको सुगर की समस्या है तो आप किशमिश का सेवन डॉक्टर से परामर्श लेने के उपरान्त ही करें। किशमिश और बादाम का प्रयोग शरीर में एच0डी0एल की मात्रा को बढाता है।

सरसों के तेल का प्रयोग (Use of Mustard Oil)

सरसों के तेल का प्रयोग

आज भारतीय बाजार में विदेशी ब्रैण्ड्स ने कब्जा जमा लिया है। आज मनुष्य द्वारा बाजार का घी, रिफाइण्ड, वेजीटेबल ऑयल का प्रयोग बहुतायत में किया जा रहा है। इन बाजार में उपलब्ध भिन्न भिन्न प्रकार के तेल के प्रयोग से भी शरीर का कोलेस्ट्रोल लेवल बढता है। सरसों के तेल में पॉली अनसैचुरेटेड फैटी एसिड एवं मोनो अनसैचुरेटेड फैट अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। कोलेस्ट्राल के लेवल को कम करने के लिये मस्टर्ड आयल का प्रयोग करें।

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धनिया के बीच का प्रयोग (Use of Coriander Seeds)

धनिया के बीच का प्रयोग

धनिये के बीज में हाइपोग्लाइसेमिक का प्रभाव होता है। कोरिएंडर सीड शुगर एवं कोलेस्ट्रोल के लेवल को कम करने का गुण रखता है।

सेब सिरका का प्रयोग (Use of Apple Cider Vinegar)

सेब सिरका का प्रयोग

एपल सीडर विनेगर में कोलेस्ट्राल एवं ट्राइग्लिसरायड के लेवल को कम करने के गुण होते हैं। इसका प्रयोग आप शरीर की अन्य बीमारियों जैसे उच्च रक्तचाप, श्वसन संक्रमण, गुप्त रोग व अन्य बीमारियों के लिये कर सकते हैं।

नारियल तेल का प्रयोग (Use of Coconut Oil)

नारियल तेल का प्रयोग

Coconut Oil is good for high cholesterol, नारियल तेल में लैरिक एसिड होता है जो एचडीएल को बढाने तथा एलडीएल तथा एलडीएल के अनुपात को कंट्रोल करता है। हालांकि नारियल तेल में  संतृप्त वसा होती है परन्तु यह हाइकोलेस्ट्रोल को कम करने में कारगर है।

मछली के तेल का प्रयोग (Use of Fish Oil)

मछली के तेल का प्रयोग

मछली जैसे टूना, ट्राउट, हेरिंग, सैल्मन, सार्डिन, मैकेरल ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होती है। यह रक्त से ट्राइग्लिसराइड (खून में वसा) को कम करता है। आप फिस ऑयल का प्रयोग कर अपने शरीर का कोलेस्ट्राल कंट्रोल कर सकते हैं।

रेड यीस्ट राइस का प्रयोग (Use of Red Yeast Rice)

रेड यीस्ट राइस का प्रयोग

रेड यीस्ट राइस (खमीर युक्त चावल) में मोनैकोलिन कम्पाउंड होता है जो कोलेस्ट्रॉल सिंथेसिस को रोकता है जिससे कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है। चीन में रेड यीस्ट राइस हजारों सालों से आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग की जा रही है। आप मैडीकल शाप्स से रेड यीस्ट राइस की टेबलेट खरीद कर प्रयोग कर सकते हैं। रेड यीस्ट राइस में अन्य कैमिकल जैसे लोवस्टाटिन पाये जाते हैं जो मानव शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। अतः कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा का उपयोग डाक्टर की सलाह के उपरान्त ही करें।

एलोवेरा का प्रयोग (Use  of Aloe Vera)

एलोवेरा का प्रयोग

ग्वारपाठा (Aloe Vera) का प्रयोग कर मानव शरीर के कोलेस्ट्राल का स्तर आसानी से कम किया जा सकता है । रोजाना खाली पेट एलोवेरा का प्रयोग आपके पेट के लिए लाभदायक है। आप एलोवेरा का जैल सुबह पानी में मिलाकर कर सकते हैं।

वाइन (Wine)

वाइन

यदि आप वाइन पीते हैं तो आप अपना शौक बरकरार रखें, सप्ताह में दो बार थोडी सी रेड ग्रेप वाइन कोलेस्ट्राल को कम करने में मदद करता है।

ग्रीन टी (Green Tea)

ग्रीन टी

ग्रीन टी में कैफीन की मात्रा कम होती है, ग्रीन टी में एंटी ऑक्सीडेंट भी पाये जाते हैं । ग्रीन टी शरीर कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है। जो बुरे कोलेस्ट्रोल को शरीर में कम करता है।

तुलसी – अदरक का प्रयोग (Use of Ginger and Basil)

तुलसी - अदरक

कोलेस्ट्रोल के घरेलू उपचार में तुलसी एवं अदरक का अहम रोल बताया गया है। तुलसी एवं अदरक में पाये जाने वाले तत्व शरीर से कोलेस्ट्राल को कम करने में मदद करते हैं।

मेथी का पानी का प्रयोग (Use of Fenugreek Water)

मेथी का पानी का प्रयोग

मैंथी में ऐसे पोषक तत्व पाये जाते हैं जो मानव शरीर में हाइ कोलेस्ट्राल को कम करने की क्षमता रखते हैं। यदि आपका कोलेस्ट्राल हाई आ रहा है तो आप भी मेथी के पानी का प्रयोग कर सकते हैं।

सेंधा नमक का प्रयोग

सेंधा नमक का प्रयोग

यदि आपके शरीर का कोलेस्ट्रोल बढ रहा है तो आपको साधारण समु्द्री नमक के इस्तेमाल से बचना चाहिए। इसके स्थान पर आप अपने भोजन में सेधा नमक को स्थान दे सकते हैं।

कोलेस्ट्रॉल के घरेलू उपचार

  • अर्जुन की छाल का प्रयोग आयुर्वेदानुसार भिन्न भिन्न बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है जैसे डायबिटीज । यह शरीर का कोलेस्ट्राल लेवल कम करने में भी सहायक है। अर्जुन की छाल आपको किसी भी पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल सकती है।
  • गुग्गल का प्रयोग भी कोलेस्ट्राल को कम करने में किया जाता रहा है।
  • हल्दी (Turmeric) में कोलेस्ट्राल एवं ट्राइग्लिसराइड्स कम करने की गुण विद्यमान होते हैं।
  • पानी पीना मानव शरीर के लिए अहम बताया गया है। शरीर में पानी की कमी भी कोलेस्ट्रॉल बढने के कारणों में से एक है। अतः प्रतिदिन कम से कम सात से आठ गिलास पानी अवश्य पीयें।
  • भोजन को गर्म खाना आयुर्वेद में लाभकारी बताया गया है। ठण्डा रखा हुआ भोजन मानव शरीर में विभिन्न बीमारियों की जननी है।
  • इलायची एवं दालचीनी के मिश्रण को गर्म दूध में मिलाकर पीने से कोलेस्ट्राल को कम करने मे मदद मिलती है।
  • तुलसी एवं नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाकर दिन में कम से कम एक बार अवश्य ले। यह पेस्ट भी कोलेस्ट्राल को कम करने का काम करता है।
  • दिन में सोने से शरीर का मैटाबोलिज्म धीमा हो जाता है अतः दिन में सोने से बचें।
  • भोजन में करी पत्ते का प्रयोग करना स्टार्ट करें। करी पत्ता में कोलेस्ट्रोल को कम करने के गुण होते हैं।
  • कसैले, कड़वे एवं तीखे खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रोल को कम करते हैं। अतः अपने भोजन में गोभी, ब्रोकली, हरी मिर्च को स्थान दें।

कोलेस्ट्राल को कम करने वाले जूस (Natural Drinks to reduce Cholesterol)

  • अनार का जूस (Pomegranate Juice)
  • संतरे का जूस (Orange Juice)
  • टमाटर का जूस / सूप (Tomato Juice / Soup)
  • कद्दू का रस (Pumpkin Juice)

कोलेस्ट्रॉल को प्राकृतिक तरीके से कैसे कम करें 

नियमित योग, आसन, प्राणायाम एवं ध्यान व एक्सरसाइज करने से आप अपने शरीर के कोलेस्ट्रॉल को आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं। हम आपको कुछ योग एवं आसन आपके शरीर के केलेस्ट्राल को कम करने के लिये बताने जा रहे हैं। आप भी इन्हें अपनाकर अपने शरीर के कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकेंगे।

  • चक्रासन
  • शलभासन
  • सर्वांगासन
  • पश्चिमोत्तानासन
  • अर्ध मस्त्येंद्रासन
  • कपालभाति प्राणायाम
  • नाड़ी शोधन प्राणायाम

यदि आप उच्च कोलेस्ट्रॉल की समस्या से पीड़ित हैं तो ऊपर वर्णित कोलेस्ट्रॉल कम करने का रामबाण इलाज एवं शरीर में कोलेस्ट्रॉल कम करने दवा करने से पहले एक विशेषज्ञ डॉक्टर से राय अवश्य लें। बिना चिकित्सक की सलाह के कोलेस्ट्रॉल कम करने की अंग्रेजी दवाओं का प्रयोग न करें साथ ही कोलेस्ट्रॉल कम करने की आयुर्वेदिक दवाओं के प्रयोग से पहले भी परामर्श अवश्य लें। बिना डाक्टर की सलाह के कोलेस्ट्राल कम करने के लिये ऊपर दी गयी चीजों से किसी का भी प्रयोग शरीर को भविष्य में नुकसान पहुँचा सकता है। चिकित्सक भी आपकी उम्र, टैस्ट रिजल्ट्स, स्थिति, एलर्जी, समग्र स्वास्थ्य एवं अन्य बातों को ध्यान में रखते हुये आपको बतायेंगे कि कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए क्या खाना चाहिए क्या नहीं। कोलेस्ट्राल के उपचार के लिए घरेलू एवं रामबाण उपचार ही कारगर हैं।

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