पुरुष का स्पर्म कितना होना चाहिए जिससे बच्चा ठहर सकता है | जाने पूरा राज

महिलाओं को गर्भवती होने के लिए पुरुष के स्पर्म की जरूरत होती है। स्पर्म को हम वीर्य के नाम से भी जानते हैं। जब महिला तथा पुरुष आपस में संभोग क्रिया करते हैं, पुरुष के लिंग से संभोग क्रिया के पश्चात एक गाढा तरल चिपचिपा द्रव निकलता है, जिसमें शुक्राणु होते हैं। यह शुक्राणु महिला के गर्भाशय में स्थित अंडाणुओ से मिलते हैं, तथा निषेचन क्रिया करते हैं। जिसके पश्चात गर्भाशय में शिशु का जन्म होता है अर्थात महिला को गर्भवती होने के लिए पुरुष के सूचनाओं की आवश्यकता होती है। स्वस्थ गर्भधारण के लिए स्वस्थ शुक्राणुओं की आवश्यकता होती है शुक्राणु जितना अधिक स्वस्थ होते हैं जन्म लेने वाला बच्चा भी उतना ही स्वस्थ होता है। 

शुक्राणु या स्पर्म क्या होते हैं

शुक्राणु

शुक्राणु पुरुष लिंग से सेक्स के समय निकलने वाले पुरुष सेल होते हैं महिलाओं को गर्भवती करने के जिम्मेदार होते हैं। शुक्राणुओं का निर्माण पुरुषों के टेस्टिस में होता है। पुरुषों के शरीर में लिंग के नीचे दो वृषण होते हैं जिनमें पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का श्रवण होता है। जिससे शारीरिक क्रिया द्वारा तथा पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन के सहयोग से टेस्टिस में शुक्राणुओं का निर्माण होता है। सेक्स क्रिया के समय यह शुक्राणु मूत्र मार्ग से महिला की योनि में गर्भाशय के पास स्खलित कर दिए जाते हैं, जो बाद में महिला के अंडों से मिलकर शिशु का निर्माण करते हैं। शुक्राणुओं का शरीर तीन भागों में विभाजित होता है- हेड, नेक, और टेल अपनी विशेष शारीरिक संरचना के कारण शुक्राणु लिंग से निकलकर योनि में अंडो तक पहुंचता है और निषेचन क्रिया करके शिशु का निर्माण करता है।

 शुक्राणु का जीवन काल 

शुक्राणु

स्पर्म के जीवन काल की बात करें तो पुरुष लिंग के निकलने के बाद महिला की योनि मार्ग में ही कुछ मिनटों के पश्चात बहुत सारे सवाल मर जाते हैं और जो शुक्राणु महिला की योनि मार्ग से होते हुए गर्भाशय ग्रीवा में पहुंच जाते हैं। वह 1 से 2 दिन तक जीवित रहते हैं, किंतु प्रयोगशाला में प्रयोग करने के लिए शुक्राणु वहां के वातावरण में 5 से 7 दिन तक जीवित रह सकते हैं। इससे अधिक शुक्राणु का जीवनकाल नहीं होता है। गर्भधारण के लिए ग्राम 1 से 2 दिन तक ही स्वस्थ रहते हैं, उसके पश्चात निष्क्रिय होने लगते हैं। 

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विश्‍व स्वास्थ्‍य संगठन (WHO) के हिसाब से एक सीमेन के नमूने में 40% शुक्राणु सक्रिय होने चाहिए। जिनकी गति 25μm/s होनी आवश्यक है। जो शुक्राणु जितनी अधिक गति से गर्भाशय में प्रवेश करता है वह उतना अधिक स्वस्थ होता है पुरुष के लिंग से स्खलित होने के पश्चात सभी शुक्राणु अपनी सर्वाधिक गति का प्रयोग करते हुए वीर्य में तैरते हुए गर्भाशय की ओर बढ़ते हैं जिस शुक्राणु की रफ्तार सबसे अधिक होती है वह शुक्राणु अंडे के साथ मिलकर निषेचन क्रिया करता है और एक भ्रूण का निर्माण करता है जिसके पश्चात महिला गर्भवती हो जाती है और कुछ समय पश्चात लगभग 9 महीने के बाद शिशु को जन्म देती है।

पुरुष वीर्य में स्पर्म काउंट

शुक्राणु

पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं के साथ-साथ अन्य पदार्थ पाए जाते हैं जिनमें कुछ प्रोटीन तथा हार्मोन होते हैं जो शुक्राणुओं को रहने तथा करने के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करते हैं अक्सर लोगों का यह सवाल होता है, कि पुरुष का स्पर्म कितना होना चाहिए जिससे बच्चा ठहर सकता है, तो इसके लिए हम आपको बता देंगे पुरुषों के वीर में स्पर्म काउंट पुरुष के शारीरिक शक्ति पर निर्भर करता है जो व्यक्ति जितना अधिक स्वस्थ तथा शारीरिक रूप से मजबूत होता है, उसके टेस्टिस में उतना अधिक पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का श्रावण होता है। टेस्टोस्टरॉन के अधिक श्रावण के कारण अधिक शुक्राणुओं का निर्माण होता है, जिससे टेस्टिस में शुक्राणु अधिक दिनों तक रहते हैं शुक्राणु जितना अधिक समय तक टेस्टिस में रहते हैं उनका पोषण उतना अच्छा होता है यदि  शुक्राणु 3 से 4 दिन तक टेस्टिस में रहते हैं तो वह परिपक्व और स्वस्थ शुक्राणु होते हैं।

जब पुरुष के टेस्टिस में स्वस्थ शुक्राणु होते हैं और शुक्राणुओं का स्खलन काफी दिनों तक नहीं होता है तो यह शुक्राणु परिपक्व होकर स्वस्थ हो जाते हैं और इनकी संख्या वीर्य में बढ़ जाती है। एक स्वस्थ पुरुष के वीर्य में 40 से 300 मिलियन शुक्राणु प्रति मिलीलीटर वीर्य में होते हैं। किंतु यदि पुरुष के प्रति मिलीलीटर वीर्य में 20 से 40 मिलियन शुक्राणु होते हैं तो वह किसी भी महिला को गर्भवती करने में सक्षम होते हैं स्पर्म काउंट के लिए विभिन्न प्रकार के विशेषज्ञों के अलग-अलग मत पाए जाते हैं किंतु यदि 20 मिलियन प्रति मिलीलीटर वीर्य में शुक्राणु पाए जाते हैं तो इसे शुक्राणुओं की कमी कहते हैं।

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वीर्य में कम शुक्राणु के नुकसान 

वीर्य में कम शुक्राणु

यदि पुरुष वीर्य में 30 मिलियन प्रति मिलीलीटर से कम शुक्राणु पाए जाते हैं तो पुरुषों का वीर्य पतला हो जाता है जिन पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम है वो मेटाबोलिक सिंड्रोम से जूझ रहे हैं, इनका वजन लंबाई के हिसाब से ज़्यादा होता है, और इनमें हाई ब्लड प्रेशर की आशंका बनी रहती है इनमें डायबीटीज, दिल की बीमारी और स्ट्रोक की भी आशंका प्रबल होती है पतले वीर्य होने के कारण पुरुषों में विभिन्न प्रकार की सेक्स समस्याएं होने लगती हैं। शीघ्रपत तथा शीघ्र स्खलन के साथ-साथ प्रजनन क्षमता भी कमजोर हो जाती है। प्रजनन क्षमता कमजोर होने के साथ ही अन्य समस्याएं होने लगती हैं। वीर्य के पतले हो जाने के कारण पुरुषों की सेक्स क्षमता कमजोर हो जाती है। जिसके कारण वे अपनी महिला साथी को सेक्स क्रिया में संतुष्ट नहीं कर पाते हैं और उन्हें विभिन्न स्थानों पर शर्मिंदगी  का सामना करना पड़ता है।

गर्भधारण के लिए शुक्राणु

महिलाओं को गर्भधारण के लिए पुरुषों के शुक्राणुओं की आवश्यकता पड़ती है महिला तथा पुरुष मिलकर जब महिला के मासिक धर्म के पश्चात सेक्स किया करते हैं जिस समय गर्भधारण की क्षमता सबसे अधिक होती है। उस समय पुरुष के लिंग से शुक्राणु निकल कर गर्भाशय में जाकर महिलाओं के अंडा के साथ निषेचित होते हैं जिसके पश्चात भ्रूण का निर्माण होता है। 

गर्भधारण के लिए शुक्राणु

पुरुषों के वीर्य में यदि 20 मिलियन प्रती मिलीलीटर से अधिक शुक्राणु होते हैं तो स्वस्थ शुक्राणु हुई अंडों के साथ निषेचित हो पाता है स्वास्थ्य शुक्राणु के साथ में निषेचन  होने के कारण महिला के गर्भाशय में स्वस्थ भ्रूण का निर्माण होता है। स्वस्थ शुक्राणु के लिए पुरुष का शारीरिक रूप के साथ-साथ मानसिक रूप से स्वस्थ होना बहुत आवश्यक होता है, जो पुरूष शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं, उनके शुक्राणुओं से उत्पन्न होने वाला शिशु स्वस्थ पैदा होता है उसे किसी प्रकार का रोग नहीं होता है।

शुक्राणु के कार्य

शुक्राणु के कार्य

शुक्राणु का कार्य निषेचन की क्रिया के दौरान अंडाणु कोशिका को निषेचित करना है। स्पर्मेटोजोआ गर्भावस्था के 9 महीने के दौरान गर्भ में भ्रूण के विकसित होने के लिए एक नए जीव युग्मनज या गैमीट का निर्माण करता है। मानव शुक्राणु कोशिकाएं हैंप्लोइड हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं।प्रत्येक वर्ष में 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं महिलाओं के अंडाणुओं में 23 जोड़ी XX गुणसूत्र होते हैं तथा पुरुषों के शुक्राणुओं में भी 23 जोड़ी XY गुणसूत्र होते हैं किंतु इनमें 22 जोड़ी XX गुणसूत्र महिलाओं के समान होते हैं  तथा 23 जोड़ी में XY गुणसूत्र भिन्न होता है पुरुषों में यह अंतिम जोड़ी का गुणसूत्र जो होता है निर्धारण करता है, की पैदा होने वाला शिशु लड़की या लड़का होगा अतः पुरुषों के शुक्राणु निर्धारित करते हैं के पैदा होने वाला बच्चा लड़की होगी या लड़का। शुक्राणु के कुछ निम्नलिखित कार्य होते हैं

  • महिलाओं अंडाणु से मिलकर गर्भाशय में निषेचन करना है।
  • अनुवांशिक गुणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ले जाना।
  • पैदा होने वाला बच्चे में लड़कि या लड़के का निर्धारण करना। 
  • अंडाणु से मिलकर भ्रूण का निर्माण करना।

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पुरुष का स्पर्म कितना होना चाहिए जिससे बच्चा ठहर सकता

महिलाओं को गर्भवती करने के लिए पुरुषों में यदि स्वस्थ शुक्राणु 20 से 40 मिलियन 10 मिलीलीटर है तो महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं गर्भवती होने को तो यदि 5 मिलियन शुक्राणु प्रति मिलीलीटर हैं फिर भी महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं किंतु गर्भ के पश्चात ऐसे में महिलाओं को बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तथा पैदा होने वाले बच्चा स्वस्थ नहीं रहता है। पैदा होने वाले बच्चे को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है इसलिए स्वस्थ शुक्राणु द्वारा ही गर्भ का निर्माण करना चाहिए जिस से पैदा होने वाला बच्चा स्वस्थ पैदा हो जिससे उसको जीवन में किसी भी विशेष प्रकार की बीमारियों तथा समस्याओं का सामना करना न पड़े।

निष्कर्ष

उपरोक्त लेख में गर्भधारण करने के लिए पुरुषों के स्वस्थ  शुक्राणु के बारे में जानकारी दी गई है जिसके द्वारा महिलाएं गर्भवती होती हैं और एक स्वस्थ शिशु को जन्म देती है जानकारी के अभाव में लोगों को अक्सर जानकारी लेते देखा गया है, कि पुरुष का स्पर्म कितना होना चाहिए जिससे बच्चा ठहर सकता है, ऐसी ही जानकारी के लिए उपरोक्त लेख में कुछ बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है। जिनके अध्ययन से आपके जान सकते हैं, कि स्वस्थ शुक्राणु क्या होते हैं, तथा शुक्राणुओं का गर्भधारण में क्या योगदान होता है। शुक्राणुओं से संबंधित किसी विशेष जानकारी के लिए किसी महिला गाइनेकोलॉजिस्ट किया डॉक्टर से संपर्क करें जो गर्भधारण की जानकारी आपको प्रदान करेंगे।

FAQ 

पुरुष में स्पर्म काउंट कितना होना चाहिए?

सामान्य सेक्स क्रिया के लिए 20 मिलियन से 40 मिलीयन मिलीलीटर शुक्राणु पर्याप्त होते हैं जिससे सामान्य सेक्स क्रिया आसानी से की जा सकती है गर्भधारण के लिए 40 से अधिक मिलियन शुक्राणु मिलीलीटर होना आवश्यक होता है और स्वस्थ मनुष्य के शरीर में मनुष्य के शारीरिक शक्ति के अनुसार 20 मिलियन से 300 मिलियन शुक्राणु प्रति मिलीलीटर स्पर्म में होते हैं। 

बच्चे पैदा करने के लिए पुरुष को क्या करना चाहिए?

बच्चे पैदा करने के लिए पुरुषों को स्वास्थ्य शुक्राणु की आवश्यकता होती है शुक्राणुओं को स्वस्थ रखने के लिए पुरुषों को अपने शारीरिक शक्ति को बढ़ाने की तरफ ध्यान देना चाहिए पुरुषों को स्वस्थ तथा मजबूत रहना चाहिए दैनिक रूप से पोषक तत्व युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए था। अल्कोहल और धूम्रपान का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिससे पुरुष के अंदर हारमोंस का श्रावण अच्छा होता है और टेस्टोरोन हार्मोन के स्राव के कारण शुक्राणुओं का निर्माण तेजी से होता है जिसके कारण पुरुष में शुक्राणु उपलब्ध होते हैं।

क्या खाने से स्पर्म ज्यादा बनता है?

अधिक मात्रा में स्पर्म बनाने के लिए टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की आवश्यकता अधिक मात्रा में होती है टेस्टोस्टेरोन हारमोंस बढ़ाने के लिए शरीर को शक्ति प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थों का प्रयोग करना चाहिए शिलाजीत अश्वगंधा तथा शतावरी चूर्ण का प्रयोग करने से शारीरिक शक्ति का विकास होता है जिससे टेस्टोरोन हार्मोन अधिक मात्रा में श्रावित होता है जिससे शर्म अधिक मात्रा में बनता है।  

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