पथरी से परेशान तो लीजिए दवाई-Kidney Stone Medicine

Kidney Stone (किडनी स्टोन) या गुर्दे की पथरी को Nephrolithiasis (नेफ्रोलिथिआसिस) तथा Renal Calculi के नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में पथरी (Calculi) अश्मरी बोला जाता है। गुर्दे की पथरी एक तरह के क्रिस्टलीय मिनरल साल्ट होते हैं। यह क्रिस्टलीय मिनरल साल्ट यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) या किडनी में एकत्रित होने लगते हैं और किडनी स्टोन या पथरी का रूप ले लेते हैं। इनका आकार छोटा या बड़ा हो सकता है। आपके मूत्र पथ या गुर्दे में मौजूद छोटा पत्थर (स्टोन) बिना किसी लक्षण या तकलीफ के मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है परन्तु इसका साइज 5 एमएम से ज्यादा का है तो यह आपके यूरीनरी ट्रैक्ट में रूकावट पैदा कर सकता है और आपको उल्टी, बेचैनी, दर्द, चक्कर, बुखार (फीवर), ठंड लगना जैसे लक्षण का सामना करना पड़ सकता है। मूत्र विसर्जन (Urination) के समय पेशाब के साथ रक्त (Blood) आना तथा दर्द महसूस होना तथा मूत्र से बदबू आना, आपके शरीर में पथरी होने का एक लक्षण है। वर्तमान में भारत में लगभग 12% लोग किडनी की पथरी की समस्या से पीड़ित हैं।

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किडनी स्टोन (पथरी) होने के कारण

शरीर में पथरी (Stone) बनने का कोई मुख्य कारण तो अभी तक पता नहीं चला है, पर वैज्ञानिक / आयुर्वेदाचार्य के अनुसार गर्म जलवायु, पानी का कम सेवन, शरीर में गर्मी बढ़ने के कारण मानव शरीर में जल की कमी (डिहाइड्रेशन) होने के कारण शरीर में भरपूर मात्रा में मूत्र नहीं बनता है और विषैले तत्व बाहर नहीं आ पाते हैं। शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है तथा कैल्शियम ऑक्लेट पेशाब के साथ शरीर से बाहर नहीं आ पाता है। इसके अतिरिक्त अन्य तत्व जैसे फॉस्फेट, मैग्नीशियम कार्बोनेट, अमोनियम फॉस्फेट किडनी की नलियों में जमने लगते हैं और धीरे धीरे स्टोन का रूप ले लेते हैं। पथरी मानव शरीर के विभिन्न हिस्से जैसे किडनी, मत्राशय, गोल ब्लेडर, पित्ताशय, मूत्रवाहिनी इत्यादि में कहीं भी हो सकते हैं परन्तु गुर्दे की पथरी की समस्या जनमानस में अधिक देखने को मिलती है।

  • कम मात्रा में पानी पीने के कारण भी पथरी की समस्या आती है।
  • मानव शरीर में मिनरल्स (खनिज) की कमी के चले भी पथरी की समस्या आती है।
  • पेशाव (यूरिन) में कैमिकल की अधिकता होने पर पथरी की समस्या आती है।
  • फास्ट फूड / जंक फूड के अधिक सेवन से भी पथरी की समस्या आती है।
  • विडामिन डी की मात्रा शरीर में बढने पर भी पथरी की समस्या आती है।
  • शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) होने पर पथरी की समस्या आती है।
  • लम्बे समय के लिए पेशाब को रोके रखने से भी पथरी की समस्या आती है।
  • भोजन के बाद तुरंत लेट जाना या आराम करने से भी पथरी की समस्या आती है।

पथरी के लक्षण

यदि आपके शरीर में स्टोन (पथरी) है तो आपको अपने पेट के निचले हिस्से में, पीठ में या कमर में तेज दर्द का अनुभव होगा। इसके अलावा चलने फिरने में दर्द हो सकता है। पथरी का दर्द अचानक से उठता है और धीरे धीरे बढ बढकर असहनीय स्थिति तक पहुँच सकता है। चूँकि मानव शरीर में पथरी भिन्न भिन्न स्थानो पर बनती है अतः पथरी से होने वाला दर्द भी शरीर के विभिन्न हिस्सो में हो सकता है। पथरी का आकार छोटा होने पर प्रायः दर्द महसूस नहीं होता है, परन्तु जब इस पथरी का आकार बढने लगता है या पथरी का वो हिस्सा पेशाब नली में फस जाता है तो दर्द महसूस होता है। पेशाब मार्ग में अचानक पथरी आने पर भयंकर दर्द होने लगता है जिसकी तीव्रत दिन प्रदितिन बढती जाती है जिसका असर जांघ, अण्डकोष एवं स्त्रियों में योनि द्वार तक पहुँच जाता है। कभी कभी मूत्र मार्ग में पथरी (स्टोन) का हिस्सा फस जाने पर मूत्र (पेशाब) रूक जाता है या मूत्र नलिका में घाव होने पर पेशाब के साथ खून आने लगता है। यदि आपके शरीर में स्टोन है तो आपके मूत्र का रंग बदलकर हल्का लाल, गुलाबी या हल्का भूरा हो जाता है। इसके साथ ही आपको अन्य लक्षण जैसे जी मिचलाना, उल्टी की शिकायत होना, बुखार, पसीना आना भी हो सकते हैं। पथरी के दर्द से पीड़ित व्यक्ति न बैठ पाता है, न लेट पाता है ना ही खड़ा हो पाता है वह बेचैन रहता है।

किडनी स्टोन के प्रकार

  • कैल्शियम ऑक्जीलेट स्टोन (Calcium oxalate Stone)
  • स्ट्रूविट स्टोन (Struvite Stone)
  • यूरिक एसिड स्टोन (Uric acid Stone)
  • सिस्टिन स्टोन (Cystine Stone)

आयुर्वेद के अनुसार पथरी के प्रकार

  • पित्त अश्मरी
  • श्लेषमा अश्मरी
  • कफ अश्मरी
  • शुक्र अश्मरी

उपरोक्त गुर्दे की पथरी के प्रकार में से कैल्शियम स्टोन तथा यूरिक एसिड स्टोन अमूमन सबसे ज्यादा होता है।

पथरी का इलाज व बचाव

गुर्दे की पथरी से पीड़ित प्रत्येक रोगी बस एक प्रश्न का जवाब ढूढता दिखाई देता है पथरी को जड़ से खत्म कैसे करे? यदि आप भी पथरी तोड़ने की दवा जानना चाहते हैं तो आप कुछ घरेलू उपाय को प्रारम्भिक स्थित में प्रयोग कर पथरी की समस्या से निजात पा सकते हैं। सर्वप्रथम पानी की सही मात्रा का सेवन शुरू कर दें। पानी गुर्दे की pathri ki dawai के रूप में पुराने समय से प्रयोग किया जाता रहा है। पथरी तोडने की दवा के घरेलू उपचार के रूप में आप कैल्शियम आक्सीलेट से भरपूर आहार जैसे मूँगफली, चुकन्दर, पालक, चाकलेट आदि का सेवन कम मात्रा में करना स्टार्ट कर दें। भोजन में प्रोटीन की मात्रा को सीमित करें, अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना भी पथरी होने के मुख्य कारणों में से एक है। यदि आप को पथरी के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो बीज युक्त फल सब्जियाँ जैसे टमाटर, भिंडी, बैंगन का प्रयोग कदापि न करें साथ ही इसके आलावा मूली, पालक, मीट, साबुत अनाज इत्यादि का सेवन बंद करना भी आपको पथरी को जड़ से खत्म करने में मदद करेगा चूँकि उक्त खाद्य पदार्थ में ऑक्सलेट पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। भोजन में सोडियम खनिज युक्त पदार्थो का प्रयोग कर दें। जंक फूड / फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स / साफ्ट ड्रिंक्स या डिब्बा बंद खाने के सेवन को न के बराबर कर दें। नमक का अत्यधिक प्रयोग भी शरीर में पथरी बनने के अवसर को बढा देता है अतः सीमित मात्रा में ही नमक का सेवन करें। नॉन वेज (मासाहार भोजन) एवं दालें शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को बढ़ाती है तो हमारी सलाह यही है कि आप हमारे द्वारा दिये गये उपायों को pathri ki dava के रूप में प्रयोग कर पथरी को नियंत्रित कर सकते हैं।

Kidney Stone Ayurvedic Medicine (पथरी तोडने की देशी दवा)

आयुर्विज्ञान में आयुर्वेदाचार्य के गहन शोध के उपरान्त पथरी का इलाज पथरी की देशी दवा से सम्भव हो सका है। इन pathri ki dawai का प्रयोग कर गुर्दे व अन्य पथरी को शरीर से बाहर निकाला जा सकता है। पथरी (किडनी स्टोन) की समस्या प्रायः कम शारीरिक गतिविधि करने वाले स्त्री पुरुष में देखी जाती है। शारीरिक श्रम न करने के कारण भोजन पूर्ण रूप से पच नहीं पाता है और खाने के कुछ मिनरल्स गुर्दे में एकत्रित होने लगते हैं और धीरे धीरे यह पथरी का रूप ले लेते हैं। अतः हमारी आपको यही सलाह है कि pathri ki dava के सेवन के साथ साथ शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाये तो आपकी स्टोन की समस्या जड़ से खत्म हो जायेगी। पथरी के इलाज के लिए मुख्यतः लोग आयुर्वेदिक / देशी इलाज प्रयोग करना चाहते हैं, क्यों कि आयुर्वेदिक मेडिसिन्स का साइड इफेक्ट न के बराबर होता है।

  • हिमालया सिस्टोन
  • वरुणादि वटी
  • दिव्य गोखुरादि गुग्गल
  • दिव्य गोखरू क्वाथ
  • मूत्रक्रीचंतक चूर्ण
  • दिव्य श्वेत पर्पटी
  • पुनर्नवा मंडूर
  • दिव्य हजरूल यहूद भस्म
  • दारुहल्दी घन
  • दिव्य लिथोम
  • दिव्य अश्मरी हर रस
  • दिव्य वृक्क दोषहर क्वाथ

Himalay Cystone(हिमालया सिस्टोन)

Himalay Cystone

हिमालया सिस्टोन टेबलेट व सिरप दोनो रूप में बाजार में उपलब्ध है। हिमालया सिस्टोन में मौजूद शिलापुष्पा (डिडिमोकार्पस पेडिकेलटा) पथरी बनने से रोकता है। शिलापुष्प अपने antimicrobial गुण के लिए भी जानी जाती है। यह आपके गुर्दे में मौजूद पथरी को तोडकर शरीर से बाहर करने में मदद करता है। इस टेबलेट / सिरप में मौजूद Pasanabheda (Saxifraga Ligulata) पथरी के कारण हुये घाव, सूजन को शांत कर आपको आराम देता है तथा इसके मूत्रवर्धक गुण मूत्र के प्रवाह को बढा देते हैं जिससे पथरी छोटे छोटे टुकडों में टूटकर कर मूत्र के साथ शरीर से बाहर आ जाती है। इसके अतिरिक्त सिस्टोन टेबलेट में मौजूद स्मॉल कैल्ट्रोप्स (गोक्षुरा) लिंग / सैक्स सम्बन्धी रोग के इलाज में प्रयोग किया जाता है, गोक्षुरा गुर्दे की पथरी, मूत्राशय के संक्रमण और अन्य मूत्र पथ के संक्रमण को रोकने की प्राकृतिक गुण रखता है, यह मूत्र के साथ आ रहे रक्त एवं दर्द को खत्म कर आपको आसानी मूत्र विसर्जन करने में मदद करता है। गोक्षुरा शरीर में विषैले तत्वों को जमने से रोकता है। आप प्रतिदिन एक सुबह शाम एक एक टेबलेट का प्रयोग कर पथरी को जड़ से खत्म कर सकते हैं।

वरुणादि वटी

वरुणादि वटी

Varunadi Vati, वरुण, पुनर्नवा, गोक्षुरा, शुद्ध गुग्गुल आदि जड़ीबूटियों का मिश्रण है। इसमें मौजूद जडीबूटियाँ पथरी को शरीर से निकालने के आयुर्वेदिक गुण रखते हैं तथा साथ ही पथरी को शरीर में बनने नहीं देता। वैद्यनाथ वरुणडी वटी व अन्य कम्पनी की वरूणादि वटी पथरी की देशी दवा है जिसका इस्तेमाल पथरी के दर्द से छुटकारा पाने में किया जाता है। यह पथरी तोडने की दवा शरीर में मौजूद पथरी को छोटे छोटे टुकडों में तोड़ देती है और पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकाल देती है। यह वटी एण्टीबायोटिक तथा गैस को जड़ से खत्म करने की दवा के रूप में भी काम करती है।

दिव्य गोखुरादि गुग्गल

दिव्य गोखुरादि गुग्गल

दिव्य गोक्षुरादि गुग्गुल, गोखरू, आंवला, हरड़ (हरीतिका), पिप्पली, बहेडा आयुर्वेदिक जडीबूटियों का मिश्रण है। दिव्य गोक्षुरादि गुग्गुल kidney stone ayurvedic medicine हैं। इसमें मौजूद गोखरू कामेच्छा को बढाता है तथा आंवला पाचन तंत्र को ठीक करने के औषधीय गुण रखता है। हरड आक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है एवं पिप्पली शरीर में आक्सीडेशन के प्रभाव को कम करता है। गोक्षुरादि गुग्गुल का प्रयोग यूरिक एसिड की रामबाण दवा लिए भी किया जाता है।जबकि बहेडा प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इस pathri ki dava के नित्य प्रयोग से किडनी (गुर्दा) मजबूत होता है।

दिव्य गोखरू क्वाथ

दिव्य गोखरू क्वाथ

दिव्य गोखरू क्वाथ जैसा कि नाम से पता चलता है गोखरू से बनी आयुर्वेदिक पथरी की देशी दवा है। दिव्य गोखरू क्वाथ के सेवन से गुर्दे में पथरी की समस्या, मूत्र सम्बन्धी विकार, पथरी के लक्षण में फायदा मिलता है। इसके सेवन से शरीर में पथरी एकत्रित नहीं होती है ना ही पथरी का आकार बढता है। पथरी के इलाज के लिए आप 10 ग्राम गोखरू क्वाथ पाउडर लेकर आधा गिलास पानी लेकर उसमें डालकर आधा होने तक उबाले और ठण्डा कर छानकर इसका सेवन प्रतिदिन करें। यह आपके प्रश्न पथरी को जड़ से खत्म कैसे करे का सटीक जबाव है।

मूत्रक्रीचंतक चूर्ण

Mutrakrichantak Churna

मूत्रक्रीचनतक चूर्ण का प्रयोग प्रमुखतः गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) के इलाज में किया जाता है। Mutrakrichantak Churna को गोखरू, अपामार्ग, कासनी, पुनर्नवा, वरूण, शिरीष, भूम्यामलकी जैसी आयुर्वेदिक जडीबूटियों का प्रयोग कर तैयार किया गया है। इस चूरन में मौजूद यह गुणकारी जड़ीबूटियाँ भूख बढाती है, लिवर फंक्शन को ठीक करती है, पथरी के कारण होने वाले घाव व सूजन को ठीक करती है तथा शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाती है। मूत्रक्रीचंतक चूर्ण शरीर में मौजूद पथरी को तोडकर बाहर निकालने में मदद करती है और पथरी को बनने नहीं देती है। इस चूरन का प्रयोग लम्बे समय तक करना होता है।

दिव्य श्वेत पर्पटी

दिव्य श्वेत पर्पटी

Patanjali Divya Swet Parpati का प्रयोग यूरिन इंफेक्शन तथा पथरी के इलाज के लिए किया जाता है। इस पथरी की दवा में मौजूद पोटेशियम नाइट्रेट (सूर्याक्षरा), फिटकरी, अमोनियम क्लोराइड शरीर से किडनी स्टोन निकालने में बहुत लाभदायक हैं। यह पेशाब की समस्या जैसे सीमित मूत्र आने की समस्या को जड से खत्म करता है। जिससे मूत्र उत्सर्जन अधिक होता है और पथरी शरीर से बाहर आ जाती है।

पुनर्नवा मंडूर

पुनर्नवा मंडूर

पुनर्नवा मंडूर (पुनर्नवादि मंडूर) होग्वीड (पुनर्नवा), सूखी अदरक, ट्रिविट, काली मिर्च, लंबी काली मिर्च, देवदार, हल्दी, हरीतकी, बिभीत्की, आंवला, कैरम और कैरावे जैसी जडीबूटी का मिश्रण है। इस पथरी की मेडिसन का प्रयोग मुख्यतः किडनी (गुर्दा) सम्बन्धी रोग, मूत्र सम्बन्धी रोग तथा पथरी के इलाज मे किया जाता है। यह दवा लिवर फंक्शन को भी ठीक करती है।

दिव्य हजरूल यहूद भस्म

दिव्य हजरूल यहूद भस्म

दिव्य हजरुल यहूद भस्म (Patanjali Divya Hazrulyahud Bhasma) पतंजलि दिव्य फार्मेसी द्वारा तैयार पथरी की देशी दवा है। इस पतंजलि भस्म का मुख्य तत्व हजरुल भस्म है जो शरीर से अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के गुण रखता है जिससे मूत्र विसर्जन अधिक होता है और पथरी छोटे छोटे कण में टूटकर पेशाब के साथ मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है। यह दवा मानव शरीर को डिटॉक्स करता है जिससे विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। यह हजरूल यहूद भस्म पथरी के कारण हो रहे दर्द व जलन के इलाज में भी प्रयोग की जाती है।

दारुहल्दी घन

दारुहल्दी घन

दारुहल्दी घन को दारूहरिद्रा के नाम से भी जाना जाता है। इस दवा का प्रयोग पेट सम्बन्धी बीमारियों के इलाज में किया जाता है। यदि आपका पेट सही रहेगा तो आपको पथरी होने के चांस भी कम हो जाते हैं। आप दारूहल्दी को नींबू के रस गुरिच के रस और शहद के साथ भी इसका प्रयोग कर सकते हैं।

दिव्य लिथोम

दिव्य लिथोम

Divya Lithom गोखरू, पुनर्नवा, पाषादभेद आदि जड़ीबूटियों का प्रयोग बाबा रामदेव एवं आचार्य बाल कृष्ण महाराज द्वारा पतंजलि फार्मेसी में बनायी गयी दवा है। जिसका प्रयोग किडनी की समस्या, पेशाब में जलन एवं पथरी के कारण हो रहे दर्द में किया जाता है। पतंजलि दिव्य लिथोम का प्रयोग आपके गुर्दे में मौजूद पथरी को छोटे महीन कड़ों में तोडकर पेशाब के साथ बाहर निकाल देती है।

दिव्य अश्मरी हर रस

दिव्य अश्मरी हर रस

Patanjali Divya Ashmarihar Ras में मौजूद तत्व पोटेशियम नाइट्रेट (सूर्याक्षरा), हजरुल यहूद, यवक्षर, मूलिकशर व कलमी शोरा के अर्क से तैयार किया गया है। यह पतजंलि फार्मेसी की पथरी में सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली दवा है। इस दवा के सेवन से आपकी मूत्र विसर्जन दर बढ़ंती है। अधिक मूत्र उत्सर्जन के कारण आपके शरीर से विषैले तत्व / खनिज बाहर निकल जाते हैं और आपकी बॉडी डिटाक्स हो जाती है। यह पेशाब सम्बन्धी बीमारी के निदान में भी प्रयोग की जाती है। इस दवा का उपयोग पथरी की बीमारी के तत्काल निवारण में इस्तेमाल की जाती है।

दिव्य वृक्कदोषहर क्वाथ

दिव्य वृक्क दोषहर क्वाथ

दिव्य वृक्कदोषहर क्वाथ (Patanjali Divya Vrikkdoshhar Kwath) मुख्यतः पथरी, गुर्दे की बीमारी, यूरिन इन्फेक्शन के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। पतंजलि दिव्य वृक्कदोषहर क्वाथ गोखरू, अपामार्ग, अमलतास, बाला, कासनी, गिलोय, कंटकारी, पुनर्नवा, अग्निमंथ, मुंज, कुशा, शतावरी, वरुण, मकोई (काकमाची), कुटकी, धमासा , पलाश, जौ, पीपल, पाशनभेदा आदि जडीबूटियों का मिश्रण है। इस pathri ki dawai का प्रयोग करने से शरीर में मौजूद पथरी गल कर निकल जाती है तथा भविष्य पुनः पथरी होने के अवसर भी कम हो जाते हैं।

जीवा गोकशुरा वरुनादि सिरप

जीवा गोकशुरा वरुनादि सिरप

Jiva Gokshurvarunadi Syrup गोखरू, अदरक, वरूण, पाशनभेदा जैसी जड़ीबूटियों से बनाया गया सिरप है। इस सिरप का प्रयोग यूरिन इन्फेक्शन, पथरी, इंफ्लेमेटरी डिजीज के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। जीवा गोक्षुरवरुणादि सिरप के प्रतिदिन प्रयोग से पथरी टूटकर मूत्र मार्ग से शरीर से बाहर निकल जाती है।

कपिवा स्टोन गो जूस

कपिवा स्टोन गो जूस

Kapiva Stone Go Juice का प्रयोग पथरी के इलाज के लिए प्रमुख रूप से किया जाता है। कपिवा स्टोन गो जूस को आंवला, बहेड़ा, पाशनभेदा जैसी आयुर्वेदिक जडीबूटी के प्राकृतिक गुणों पर रिसर्च करने के उपरांत तैयार किया गया है। यह जूस पथरी के इलाज के लिए एकदम सही दवा है।

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हेल्थविट यूरिनीड सीडी कैप्सूल

हेल्थविट यूरिनीड सीडी कैप्सूल

Healthvit Urineed CD Capsule का प्रयोग गुर्दे (किडनी) सम्बन्धी बीमारियों की इलाज में किया जाता है। हेल्थविट यूरिनीड सीडी कैप्सूल करौंदा, डी मैनोस के मिक्चर से तैयार कैप्सूल है। जो पथरी तथा वृक्क की समस्या में लाभ पहुँचाता है। यह पथरी की मेडीसिन सूजन को कम करता है। लिवर के इंफेक्शन को ठीक कर लिवर फंक्शन को दुरुस्त करता है तथा शरीर में मत्र उत्सर्जन को बढ़ाता है।

डियोकोर्टिन कैप्सूल

डियोकोर्टिन कैप्सूल

Diucortin Capsule एक आयुर्वेदिक पथरी की दवा है। इस कैप्सूल के मुख्य घटक गोखरू, पुनर्नवा हैं। इस कैप्सूल में मौजूद औषधि मूत्र विसर्जन के रेट को बढ़ाती है साथ ही किडनी स्टोन के कारण लिंग व गुर्दे में आयी सूजन को कम करती है।

गुर्दे की पथरी निकालने के घरेलू उपाय

पथरी रोग की समस्या से निजात पाने के लिए आप अपने चल रहे इलाज के साथ साथ घरेलू उपाय भी आजमा सकते हैं। प्रायः देखा गया कि पथरी से पीडित व्यक्ति विभिन्न पैथी में उपलब्ध इलाज की तरफ न जाकर पथरी की देशी दवा (kidney stone ayurvedic medicine) व पथरी निकालने के घरेलू उपाय को प्रयोग करना ज्यादा पसंद करते हैं।

  • सौफ, धनिया का मिश्रण (Mixture of Fennel and Coriander seed)- सौंफ, धनिया, मिश्री को बराबर बराबर (50 – 50 ग्राम) की मात्रा में साथ लेकर पीसकर चूर्ण बना लें । इस मिक्चर से एक चम्मच रोजाना रात को आधा कप पानी के साथ सेवन करें। इस मिश्रण के प्रयोग से समय अवश्य लगेगा परन्तु आपके गुर्दे की पथरी कट कट कर धीरे धीरे मूत्र मार्ग से बाहर निकल जायेगी।
  • तुलसी (Basil) का प्रयोग किडनी स्टोन को ठीक करने का प्रचलित घरेलू उपाय (Kidney stone ke gharelu upay) हैं। प्रतिदिन 5 से 7 तुलसी पत्तो का सेवन करें परन्तु याद रखें कि तुलसी के पत्तों को चबा कर नहीं खाना है क्योंकि तुलसी के पत्तों में लैड होता है जो आपके दाँतों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। तुलसी के पत्तों में उपस्थित एसीटिक एसिड व अन्य तत्व पथरी को तोड़कर पेशाव के साथ बाहर निकाल देताें हैं। पथरी तोड़ने की दवा तुलसी, दर्द निवारक दवाई के रूप में प्राचीन समय से प्रयुक्त की जाती रही है।
  • चौलाई या राजगीरा (Amaranth) की सब्जी पथरी को गलाने का रामबाण इलाज है। चौलाई की सब्जी के प्रयोग से पथरी गलकर टूटकर मूत्रमार्ग से बाहर आ जाती है।
  • बेलपत्र में भी पथरी तोड़ने के गुण विद्यमान है। आप 2 से 3 बेल वृक्ष के पत्ते जिन्हें बेलपत्र बोला जाता हैं लें तथा इसकी सिल बट्टे पर चटनी बना लें और प्रतिदिन दो सप्ताह तक इस चटनी काली मिर्च डालकर सेवन करें। बेलपत्र पथरी की देशी दवा है जो आपके गुर्दे की पथरी को काटकर बाहर निकाल देगी।
  • पत्थरचट्टा (पथर चटा) एक ऐसा पौधा है जिसकी पत्तियों का प्रयोग किडनी एवं पेट सम्बन्धी बीमारियों के इलाज में बहुतायत से किया जाता रहा है। यदि आप भी किडनी स्टोन से परेशान हैं तो आप पत्थर चट्टा को ayurvedic herb for kidney stone के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।
  • बालम खीरा, खीरे की तरह दिखने वाला फल है जो पेट सम्बन्धी बीमारियों के इलाज के लिए रामबाण है। बालम खीरा, पेड से प्राप्त होता है जो कि स्वाद में कडवा होता है। आप बालम खीरा को सुखाकर इसका चूर्ण तैयार कर लें तथा इस चूर्ण का प्रयोग एक सुबह खाली पेट सादा पानी के साथ करें । यह चूर्ण आपको आपकी पथरी की समस्या से निजात दिलायेगा ही साथ आपके पेट सम्बन्धी अन्य रोग जैसे गैस बनना, भूख न लगना, कब्ज आदि को भी दूर करेगा।
  • गिलोय (गडूची) का प्रयोग पथरी एवं पथरी से जुडे अन्य रोगों के इलाज में किया जाता है। अगर आप भी पेशाब करते समय जलन महसूस कर रहे हैं तो गिलोय चूर्ण का सेवन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। गिलोय चूर्ण की 10 ग्राम मात्रा को 10 ग्राम आंवला चूर्ण, 5 ग्राम सौंठ चूर्ण, 3 ग्राम गोखरू बीज चूर्ण, 5 ग्राम अश्वगंधा पाउडर के साथ मिलाकर 100 ग्राम पानी में डालकर जब तक उबाले जब तक कि यह पानी 50 ग्राम न रह जाये और प्रतिदिन इस पेय का दिन में एक बार प्रयोग अवश्य करें। कुछ ही समय में पथरी टूटकर बाहर आ जायेगी। यह पथरी का इलाज सबसे कारगर है।
  • पुनर्नवा का पौधा किडनी स्टोन के कारण होने वाले पेट व कमर दर्द को दूर करने में सहायक है। यह आप भी पथरी के असहनीय दर्द से गुजर रहे हैं तो पुनर्नवा, कचूर और अदरक की समान मात्रा लेकर मिलाकर सेवन करें आपको बहुत अच्छा लाभ प्राप्त होगा।
  • गुडहल के पत्तो का चूर्ण जो आपको पंसारी की दुकान पर आसानी से मिल जायेगा। हिबिस्कस पाउडर को आपको प्रतिदिन खाना खाने के कम से कम एक घण्टे बाद गर्म पानी से फांक लेना है तथा उसके बाद न कुछ खाना है ना पीना है। यह चूरन स्वाद में कडवा अवश्य होता है परन्तु गुडहल का चूर्ण पथरी को खत्म करने की सबसे कारगर दवा है। कुछ ही हफ्तों में यह पथरी को तोडकर शरीर से बाहर निकाल देती है।
  • विटामिन बी युक्त पदार्थ, पथरी के आकार को बढने से रोकता है। आप अपने भोजन में Vitamin B युक्त फल सब्जी का सेवन कर पथरी की समस्या से निजात पा सकते हैं। आप बाजार में उपलब्ध विटामिन बी टैबलेट्स का प्रयोग पथरी तोड़ने की दवा के रूप में कर सकते हैं।
  • नीबू और जैतून के तेल, 4 चम्मच नींबू रस, को 4 चम्मच ऑलिव आयल के साथ मिक्स कर लें और घोल का प्रयोग आवश्यकतानुसार दिन में दो से तीन बार पानी के साथ मिलाकर करें आपकी गुर्दे की पथरी 3 दिन के अंदर बाहर निकल जायेगी।
  • सेब का सिरका (Apple cider vinegar) की दो चम्मच, एक कप गुनगने पानी में एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से भी किडनी स्टोन बाहर निकल जाती है, क्योंकि सेब के सिरके में क्षारीय गुण विद्यमान होते हैं।
  • अनार के जूस के प्रतिदिन सेवन से, अनार में मौजूद पौटेशियम पथरी बनने से रोकता है। अनार का रस भी क्षारीय होता है जो पेशाब मे एसिड के स्तर को नियंत्रित रखता है। यह पथरी की देशी दवा है।
  • तरबूज एव खरबूज में पौटेशियम होता है जो किडनी की क्षमता को बढाता है और मजबूत बनाता है। तरबूज में मौजूद खनिज पौटेशियम पेशाब में अम्ल की मात्रा की बराबर रखता है। चूँकि तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती है जिस कारण शरीर के अंदर पानी की कमी पूरी होती है और पथरी यूरिन के साथ बाहर आ जाती है।
  • राजमा (Kidney Beans) की कुछ मात्रा लेकर उसे रात भर पानी में डालकर छोड दे। सुबह राजमा को उबाल कर, उबलने के बाद निकले पानी का सेवन कुछ समय तक करें। किडनी स्टोन बाहर आ जायेगी।
  • मकई (कॉर्न हेअर, कॉर्न सिल्क) के प्रयोग से यूरिन अधिक बनता है और पथरी छोटे छोटे कणों में टूटकर शरीर से बाहर निकल जाती है।
  • व्हीट ग्रास को पानी में डाले उसके बाद उबाल कर ठण्डा कर लें। इसके नियमित प्रयोग से पथरी तथा गुर्दे से सम्बन्धित अन्य रोग भी ठीक होते हैं। व्हीट ग्रास पथरी तोड़ने की आयुर्वेदिक दवा है।
  • अश्वगंधा में शिश्न एवं मूत्र संबंधी विकार दूर करने के आयुर्वेदिक गुण पाये जाते हैं। अश्वगंधा की जड के चूर्ण को प्रतिदिन गर्म पानी के साथ सेवन करने से पथरी के दर्द में आराम मिलात है साथ ही गुर्दे की पथरी गल कट कर बाहर निकल जाती है।
  • कुलथी को गुर्दे की पथरी का रामबाण इलाज माना जाता है। वैद्य एवं आयुर्वेदिक डॉक्टर कुलथी का प्रयोग पथरी के आयुर्वेदिक इलाज के लिए करते हैं। कुलथी शरीर में यूरिन की मात्रा को बढ़ा देते हैं। जिस कारण पेशाब के साथ पथरी के कण बाहर निकल जाते हैं।
  • पाषाणभेद हिमालय पर पाये जाने वाली जडीबूटी है। जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है यह शरीर में मौजूद पत्थर को भेदने के गण रखती है। पाषाणभेद राइजोम्स होते हैं जो यूरिक एसिड की मात्रा को कंट्रोल करती है। पाषाणभेद पथरी तोड़ने की दवा है इसका काढा बानकर पीने से पथरी टूटकर मूत्र मार्ग से मूत्र के साथ बाहर निकल जाती है।

गुर्दे की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज (थैरिपी व कर्म)

स्वेदन कर्म

किडनी की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज स्वेदन कर्म के प्रयोग से सम्भव है। इस कर्म पद्धति में भाप या तेल का प्रयोग कर शरीर से पसीना निकाला जाता है। इस क्रिया के प्रयोग से शरीर का वात संतुलित होता है तथा पसीना निकलने के कारण बॉडी डिटॉक्स होती है।

विरेचन कर्म

विरेचन कर्म एक आयुर्वेदिक वैदिक कर्म पद्धति है जिसमें रक्त या मल के द्वारा शरीर को डिटाक्स किया जाता है। इस क्रिया में जडीबूटियों की मदद से शरीर से मल को निष्कासित किया जाता है। इससे पेट में मौजूद एसिड बाहर निकल जाता है तथा एसिडिटी की समस्या से आराम मिलता है। वहीं विरेचन कर्म रक्त द्वारा कराने हेतु जोंक का प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में जोंक को आपके पेट पर छोड दिया जाता है तथा यह जोंक आपके रक्त को चूस (सक) कर शरीर में मौजूद गंदगी को बाहर निकालते हैं। जब जोंक पर्याप्त मात्रा में खून चूस लेता है तो इन जोंक को शरीर से अलग कर घाव पर हल्दी का लेप लगा दिया जाता है। विरेचन कर्म से आपकी मूत्र सम्बन्धी समस्यायें तथा वात रोग में आराम मिलता है।

वमन कर्म

वमन कर्म, पंचकर्म का एक हिस्सा है। इस प्रक्रिया में वच, नीम, काला नमक, परवल, कैलेमस का पाउडर आदि जड़ी बूटियों का सेवन कउल्टी (वोमिट) करायी जाती है जिससे शरीर के अंदर पथरी बनाने वाले कारक कैल्शियम, ऑक्सालेट आदि  बाहर निकल जाते हैं और बॉडी डिटाक्स होती है।

बस्ती कर्म

बस्ती कर्म आयुर्वेदिक एनिमा की तरह कार्य करता है। बस्ती कर्म में जडीबूटियों का प्रयोग कर मल त्याग कराया जाता है। इस कर्म के प्रयोग से वात नियंत्रित होता हैऔर किडनी की पथरी से राहत मिलती है।

पथरी तोड़ने की होमियोपैथिक दवा (Homeopathic medicines for Stone)

होमोपैथिक दवा का सेवन लम्बे समय तक तथा खान पान के परहेज के साथ जरूर करना पड़ता है परन्तु यह रोग को जड़ से खत्म  कर देता है। पथरी निकालने की होम्योपैथी दवा लेने के उपरान्त पथरी दोबारा बनने का खतरा बिल्कुल खत्म हो जाता है।

बर्बेरिस बल्गारिस (Berberis Vulgaris)

बर्बेरिस बल्गारिस

गुर्दे एवं पित्ताशय दोनों ही प्रकार की पथरी के इलाज के लिए होम्योपैथी में सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली मेडिसिन बर्बेरिस बुल्गारिस है। यह दवा होमियोपैथी डॉक्टर द्वारा निम्न लक्षण होने पर दी जाती हैः- वृक्क या गुर्दे के जगह से दर्द शुरू होकर पेट के निचले हिस्से तक या पाँव तक दर्द जाना, हिलने-डुलने (Movement) करने या प्रेशर के साथ दर्द बढ़ना, दर्द कम होने पर पीड़ित का दाहिने ओर झुकना, म्यूकस युक्त या चिपचिपा लाल या चमकदार लाल कण युक्त मूत्र आना, पेशाब में जलन होना, बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने के बाद ऐसा महसूस होना जैसे कुछ पेशाब अभी रह गया हो मीन्स पेशाब का ठीक से पास न होना, मूत्र विसर्जन करने पर जांघ या कमर में दर्द होना इत्यादि।

ओसिमम कैनम (Ocimum Canum)

ओसिमम कैनम

ओसिमम कैनम दवा तुलसी के पत्तों का प्रयोग कर बनायी जाती है। इस होमोपैथी दवा में मानव शरीर में यूरिक एसिड बनने की क्षमता को कम करने के गुण है। यूरिक एसिड के कारण बनने वाली पथरी के इलाज की यह रामबाण दवा है।

लाइकोपोडियम (Lycopodium)

लाइकोपोडियम

यदि मूत्र विसर्जन के समय आपको कमर में तेज अर्द महसूस होता है, दाहिनी गुर्दे (किडनी) में दर्द होता है, बार बार मूत्र आता है, मूत्र विसर्जन के समय पेशाव में लाल कण दिखाई पड़ते हैं, पेशाब खुल कर नहीं आता है बूंद बूंद टपकता है तो आप लाइकोपोडियम (Lycopodium) दवा का प्रयोग डॉक्टर की सलाह पर कर सकते हो।

सारसापेरिला (Sarsaparilla)

सारसापेरिला

बैठकर पेशाब करते समय दर्द होना, बूंद बूंद कर पेशाब का निकलना, मटमैला पेशाब लगना, पेशाब में सफेद पदार्थ निकलना, पेशाब के लास्ट में असहनीय दर्द का अनुभव होना तथा गर्म चीजों के सेवन करने पर दर्द का बढना आदि कारण होने पर आप सारसापेरिला (Sarsaparilla) होमियोपेथिक मेडिसिन का प्रयोग कर सकते हैं।

कैल्केरिया कार्ब (Calcarea Carb)

कैल्केरिया कार्ब

किडनी की पथरी के इलाज के लिए होमियोपैथी में कैल्केरिया कार्ब (Calcarea Carb) दवा का प्रयोग किया जाता है। यह दर्द दूर करने की मुख्य दवा है। मूत्र नलिका में पथरी के फसने, दर्द होने, पथरी के रोगी को पसीना आने आदि लक्षण होने पर इस दवा को डाक्टर द्वारा दिया जाता है।

कैंथारिस (Cantharis)

कैंथारिस

मूत्र सम्बन्धी बीमारी जैसे पेशाब करते समय जलन, दर्द आदि समस्याओं के इलाज के लिए कैंथारिस होम्योपैथी मेडिसिन का प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त गुर्दे में दर्द होने पर भी डाक्टर द्वारा इस दवा को प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। यदि आपके किडनी स्टोन के चलते दर्द लिंग तथा अण्डकोष तक आ गया है तो डाक्टर की सलाह पर आप इस होम्योपैथी मेडिसिन Cantharis का प्रयोग कर सकते हैं।

पथरी तोडने की दवा

पथरी का इलाज करने से पूर्व आपको पता होना चाहिए कि आपको किस टाइप की पथरी है। चलिये तो हम यहाँ आपको बताते हैं कि पथरी को बढ़ने से रोकने के लिए कौन सी दवाओं का प्रयोग किया जा सकता है।

एलोप्यूरिनॉल (Allopurinol)

एलोप्यूरिनॉल

एलोप्यूरिनॉल (Allopurinol) का प्रयोग मुख्यतः गाउट एवं यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में किया जाता है। यदि आप शरीर में अधिक मात्रा में बन रहे यूरिक एसिड के कारण बनने वाली पथरी की समस्या से परेशान हैं तो आप इस पथरी की दवा का प्रयोग कर सकते हैं। यह दवा यूरिक एसिड की मात्रा को कम करती है जिस कारण पथरी का बनना तथा पथरी का आकार बढना कम हो जाता है। अलोप्यूरिनोल को डाक्टर की सलाह पर ही प्रयोग करे क्योंकि इस मेडिसिन के मानव शरीर पर कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैंः- त्वचा पर लाल दाने हो जाना, जी मिचलाना तथा उल्टी, मल का पतला हो जाना, लिवर फंक्शन खराब हो जाना।

थिआज़ाएद डाइयूरेटिक (Thiazide diuretics)

थे आज़ाद डाइयूरेटिक मेडीसन शरीर में वृक्क पर कार्य करके पेशाब उत्पादन को बढाती है। इस दवा के प्रयोग से आपको अधिक पेशाब आता है तथा अतिरिक्त कैल्शियम व अन्य खनिज पेशाब के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इस दवा के प्रयोग से मुख्यतः कैल्शियम से होने वाली पथरी के होने की सम्भावना कम हो जाती है। यदि आप पहले से ही कैल्शियम पथरी के रोगी हैं तो यह दवा पथरी का आकार बढने नहीं देगी। इस दवा को डॉक्टर की सलाह पर ही प्रयोग करे।

पोटैशियम सिट्रेट (Potassium citrate)

Potassium citrate

पोटैशियम सिट्रेट (Potassium citrate) के सेवन से पेशाब में एल्काइन गुण बढ जाते हैं तथा पेशाब क्षारीय बनता है। जिस कारण हमारे शरीर में बना एक्सेसिव यूरिक एसिड मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है और पथरी की समस्या को दूर करता है।

प्रीबाओटिक्स और प्रोबाओटिक्स (Prebiotics and Probiotics)

प्रीबाओटिक्स और प्रोबाओटिक्स

यह मानव शरीर में आक्जीलेट की मात्रा को कम करता है। यदि आपको कैल्शियम ऑक्सालेट की पथरी है तो आप इस pathari ki dawai का प्रयोग कर अपनी पथरी को कंट्रोल कर सकते हैं।

पथरी निकालने की दवा (सिरप)

यदि आपकी पथरी यूरेटर के निचले हिस्से मे फसी है तथा आकार 6mm से कम है तो आप kidney stone ayurvedic medicine सिरप का प्रयोग कर पथरी की समस्या से निजात पा सकते हैं।

लासिक्स और नार्मल सेलाइन (Lasix and normal saline)

यह एक प्राचीन पथरी की दवा है पर आज भी छोटे गाँव आदि में इस दवा का प्रयोग पथरी के इलाज में किया जाता है। जबसे विज्ञान ने तरक्की की है तबसे पथरी के इलाज के बेहतर एवं किफायती उपचार आ गये हैं। लासिक्स (Lasix) या फ्युरोसेमाइड (Furosemide) उच्च रक्तचाप में प्रयोग की जाने वाली दवा है। यह दवा गुर्दे पर प्रभाव डालकर शरीर में ज़्यादा पेशाब बनाती है।  इससे मरीज़ को दिन भर ज़्यादा पेशाब आता है। मूत्र के विसर्जन का बहाव बढ़ने से गुर्दे की पथरी पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है। ज़्यादा पेशाब आने से, मरीज़ के शरीर में पानी की कमी होने के चांस बढ जाते हैं, इसलिए जरूरी है कि मरीज़ को नार्मल सेलाइन भी दिए जाये जिससे पानी की कमी पीडित के शरीर में न हो।

अल्फा ब्लॉकर्स (Alpha blockers)

टेम्सुलोसिन (Tamsulosin) एक अल्फा ब्लॉकर है जो मूत्र मार्ग पर असर करके ज्यादा मात्रा में पेशाब उत्पन्न करते है तथा अधिक मूत्र विसर्जन होता है। जिसके साथ पथरी छोटे छोटे कण होकर पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है। इस दवा का प्रयोग हाई ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में भी किया जाता  है।

निष्कर्ष

उपरोक्त लेख में हमने पथरी को जड़ से खत्म कैसे करे के सम्बन्ध में सभी पैथियों की जानकारी दी है। जिससे आपको अपने पथरी के रोग के इलाज में बहुत सहायता मिलेगी। हमारे इस लेख में पथरी के लक्षण, पथरी होने के कारण, पथरी की दवा सभी टापिक्स को कवर करते हुए जानकारी प्रदान की गयी है, परन्तु हमारे द्वारा वर्णित आयुर्वेदिक / होमोपैथिक / देशी दवा एवं अंग्रेजी दवाओं के प्रयोग से पूर्व चिकित्सकीय परामर्श लेना बेहतर होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्नः क्या पथरी के आपरेशन के बाद पथरी होने के चांस रहते हैं?

उत्तरः हाँ, यदि आप अपनी जीवनशैली में परिवर्तन नहीं ला रहे हैं तो खराब दिनचर्या के चलते पथरी दोबारा होने के चांस रहते हैं।

प्रश्नः पथरी रोग से पीडित व्यक्ति को क्या परहेज रखने चाहिए?

उत्तरः पथरी के रोग में रोगी को मछली, टमाटर, बैंगन, पालक, मांस, कोल्ड ड्रिंक का प्रयोग बन्द कर देना चाहिए।

प्रश्नः नीबू के रस से पथरी का इलाज कैसे करें?

उत्तरः एक कटोरी दही में नीबू का रस मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से पथरी टूटकर शरीर से बाहर निकल जाती है।

प्रश्नः पथरी के रोगी को किस प्रकार के फल का सेवन करने चाहिए?

उत्तरः पथरी के रोगी को पानी वाले फल जैसे तरबूज, खरबूज, खीरा, ककडी आदि एवं खट्टे फल जैसे नीबू, आंवला, अंगूर, अन्नास, संतरा, अनार आदि का प्रयोग करना चाहिए

प्रश्नः पथरी के रोगी के लिए कौन से जूस फायदेमंद हैं?

उत्तरः पथरी के रोगी को अनार का जूस, खीरे का जूस, तुलसी के पत्तो का रस, राजमा का रस, नीबू पानी का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्नः पथरी के लिए देशी दवा बताए।

उत्तरः पत्थर चट्टा पथरी की देशी दवा है।

प्रश्नः पेशाब की नली में पथरी का टुकडा फस जाये तो क्या किया जाए?

उत्तरः पेशाब की नली में यदि पथरी फस जाये तो केले में पिपरमिंट मिलाकर सेवन करना चाहिए।

प्रश्नः क्या पथरी स्टोन जानलेवा बीमारी है।

उत्तरः कभी कभी किडनी की स्टोन जानलेवा हो सकती है, क्योंकि किडनी की पथरी को निकालना आसान नहीं होता है।

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